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|| देव गण, मनुष्य गण, राक्षस गण ||

जो लोग ज्योतिष के बारे में ज़्यादा नहीं जानते बस ऐसा समझ लीजिए कि हमारी १२ राशियां के २७ नक्षत्र, ३ बड़े हिस्सो में विभाजित हैं - देव गण, मनुष्य गण, राक्षस गण। (हर गण में ९ नक्षत्र आते हैं) वैदिक ज्योतिष में २७ नक्षत्र है जिनमे हर नक्षत्र के ४ पद हैं।  कुल मिला के १०८ पद हैं जो हमारी १२ राशियों में विभाजित हैं। गण देखने के लिए सबसे पहले अपने चन्द्रमा की राशि और नक्षत्र देखें। फिर देखें आपका नक्षत्र किस विभाजित हिस्से में आता है मान लीजिए आप स्वाति नक्षत्र के है, तो आपका गण देव गण हुआ। देव गण - जिन जातकों का जन्म अश्विनी, मृगशिरा, पुर्नवासु, पुष्‍य, हस्‍त, स्‍वाति, अनुराधा, श्रावण, रेवती नक्षत्र में होता है, वे देव गण के जातक होते हैं। सुंदरों दान शीलश्च मतिमान् सरल: सदा।  अल्पभोगी महाप्राज्ञो तरो देवगणे भवेत्।। देव गण में जन्मे जातक सुंदर, दान में विश्वास करने वाले, विचारों में श्रेष्ठ, बुद्धिमान होते हैं। इनको सादगी बेहद प्रिय है, जिस काम को करने का प्रण लेते हैं उसको करके ही मानते हैं। मनुष्य गण - जिन जातकों का जन्म भरणी, रोहिणी, आर्दा, पूर्वा फाल्गुनी, उत्तर फाल्गुनी, पूर्व...
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महान आसुरी संस्कृति

मुमताज महल से शाहजहाँ को इतना प्रेम था कि उसके मरने पर उसने उससे उत्पन्न १७ वर्ष की अपनी स्वयं की सगी बेटी जहाँआरा को ही अपनी बादशाह बेगम बना लिया था।  जबकि शाहजहाँ की आठ बेगमों में से तीन जीवित थीं।  किन्तु शाहजहाँ को १७ वर्ष की बेटी जहाँआरा ही “बादशाह बेगम” बनने योग्य लगी। जहाँआरा दारा शिकोह की समर्थक थी और बाप को कैद किये जाने पर बाप के साथ रही। किन्तु बाप के मरने पर औरंगजेब से दोस्ती करके अपनी छोटी बहन रोशनआरा को हटाकर औरंगजेब की “बादशाह बेगम” बन गयी।  पहले अपने सगे बाप की बेगम थी फिर अपने भाई की बेगम बन गई। बाद में औरंगज़ेब ने अपनी सगी बेटी जीनत को अपनी “बादशाह बेगम” बनाया। इसी क्रम में मुगल बादशाह फर्रूखसियर ने भी अपनी ही बेटी को अपनी “बादशाह बेगम” बनाया था। शाहजहाँ ने अपनी बेटी तथा औरंगजेब ने अपनी दो बहनों और बेटी को बारी बारी से अपनी “बादशाह बेगम” बनाया। यह मुगलों की महान सभ्यता थी।  उनकी बेगमों की सूची internet पर उपलब्ध है। मुगलों की कब्रें खोदकर जब तक उन सबका DNA टेस्ट नहीं होता तब तक कहना कठिन है कौन अपनी बहन वा बेटी का क्या था। मुगल क्रूर थे ...

ताजमहल मंदिर भवन है

हम सदियों से सुनते आ रहे हैं कि आगरा मे स्थित संगमरमर की वो मीनारें प्रेम का प्रतीक है, ना जाने कितने गानों मे भी इसे दर्शाया गया है परन्तु क्या सच मे वो प्रेम का प्रतीक है ? या प्रतीक है मुगलों द्वारा की गयी सनातन संस्कृति एक और आघात का , भ्रष्टाचार और क्रूरता का ?  ये श्रृंखला P.N .Oak द्वारा लिखित पुस्तक " ताजमहल मंदिर भवन है" पर आधारित है , इस किताब मे दिये गये तथ्यों को पढ़कर ये स्पष्ट रूप से दिखाई पड़ता है कि इतिहास मे कितनी हेरा- फेरी की गई है ।  किसी भी ऐतिहासिक इमारतों पर दो प्रकार से विचार कलना चाहिए-  1.उसका आकार,विस्तार, रंग-रूप  और उसमें अंकित चिह्न। 2.उसके निर्माण सम्बंधित दिया जाने वाला दस्तावेज। और ताजमहल को इन दोनों ही प्रकार से विचार करने पर झूठ के स्याही से लिखा स्पष्ट रूप से दिखाई पड़ता है,  क्योंकि ताज महल मे ऐसे अनेक चिह्न पाये गये है जिनका महत्व सनातन परंपरा से जुड़ा हुआ है ना कि इस्लामी,जैसे- ● ताजमहल के गुम्बद मे आवाज़ प्रतिध्वनित करने का गुण, कब्र मे शांति के स्थान पर आवाज गूँजे ऐसी गुण वाले गुम्बद क्...