जो लोग ज्योतिष के बारे में ज़्यादा नहीं जानते बस ऐसा समझ लीजिए कि हमारी १२ राशियां के २७ नक्षत्र, ३ बड़े हिस्सो में विभाजित हैं - देव गण, मनुष्य गण, राक्षस गण। (हर गण में ९ नक्षत्र आते हैं) वैदिक ज्योतिष में २७ नक्षत्र है जिनमे हर नक्षत्र के ४ पद हैं। कुल मिला के १०८ पद हैं जो हमारी १२ राशियों में विभाजित हैं। गण देखने के लिए सबसे पहले अपने चन्द्रमा की राशि और नक्षत्र देखें। फिर देखें आपका नक्षत्र किस विभाजित हिस्से में आता है मान लीजिए आप स्वाति नक्षत्र के है, तो आपका गण देव गण हुआ। देव गण - जिन जातकों का जन्म अश्विनी, मृगशिरा, पुर्नवासु, पुष्य, हस्त, स्वाति, अनुराधा, श्रावण, रेवती नक्षत्र में होता है, वे देव गण के जातक होते हैं। सुंदरों दान शीलश्च मतिमान् सरल: सदा। अल्पभोगी महाप्राज्ञो तरो देवगणे भवेत्।। देव गण में जन्मे जातक सुंदर, दान में विश्वास करने वाले, विचारों में श्रेष्ठ, बुद्धिमान होते हैं। इनको सादगी बेहद प्रिय है, जिस काम को करने का प्रण लेते हैं उसको करके ही मानते हैं। मनुष्य गण - जिन जातकों का जन्म भरणी, रोहिणी, आर्दा, पूर्वा फाल्गुनी, उत्तर फाल्गुनी, पूर्व...